लर्न हिन्दी एण्ड हिन्दी फिल्म सॉन्ग्स - अंजना संधीर Learn Hindi & Hindi Film Songs - Hindi book by - Anjana Sandhir
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लर्न हिन्दी एण्ड हिन्दी फिल्म सॉन्ग्स

अंजना संधीर

प्रकाशक : पिजन बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :745
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 9746
आईएसबीएन :978938440102

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हिन्दी फिल्मों के हिट गानों के द्वारा हिन्दी भाषा सिखाने का एक अभिनव प्रयोग

हिन्दी शिक्षण का एक सफल माध्यम हैं हिन्दी फिल्मी गीत: डॉ. अंजना संधीर

लगभग पंद्रह वर्ष पूर्व हिन्दी फिल्म संगीत के सम्राट श्री नौशाद अली साहब अहमदाबाद पधारे थे। महान गायक स्वर्गीय मोहम्मद रफी की याद में महोम्मद रफी की आवाज में गाने वाले श्री अमरीश परीख ने एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया था। एक पत्रकार की हैसियत से नौशाद साहब से मुलाकात का अवसर मुझे मिला। अपनी मुलाकात में बहुत सारी बातें उन्होंने की। लोगों र्ने जो उन्हें प्यार दिया उस से बेहद खुश थे और हदृयपूर्वक उन्होंने खुशी-खुशी बताया कि अमरीका जब इलाज के लिये गये तो भारतीय डाक्टरों ने उनका बहुत सम्मान किया और कहा कि आप के गीत सुन- सुन कर ही तो हम डॉक्टर बने हैं- खुश होते हुए उन्होंने कहा था- 'मेरा मन बाग-बाग हो गया, एक कलाकार को जीते जी इससे ज्यादा सम्मान और क्या मिल सकता है कि सुदूर मुल्क में भी उसकी कला का चर्चा हो, वो लोगों के दिल में बसा हो।'' उस समय उनकी मुलाकात को अखबार में छाप कर मैंने इस बारे में कुछ और ख्याल नहीं किया।

लेकिन हमारे फिल्मी गीत सिर्फ गीत या मनोरंजन का साधन नहीं हैं वे हमारी भाषा और संस्कृति के संवाहक हैं। उनमें हमारी बोलियों, हमारे प्रांतों, धर्मों, त्यौहारों के सतरंगी रंग हैं और वे शिक्षा के लिए सबसे आसान माध्यम भी हो सकते हैं इस बात का ज्ञान अमरीका आकर विदेशी छात्रों को हिन्दी पढ़ाते-पढ़ाते हुआ। कक्षा को जीवंत बनाये रखने का काम ये गीत बड़ी अच्छी तरह से करते हैं इतना ही नहीं व्याकरण तुरंत समझने में भी मदद करते हैं ये मैंने अपने प्रयोगों से जाना जैसे कि जब छात्रों को विभिन्न काल पढ़ाने होते हैं तो कई बार आसानी से वे समझ नहीं पाते ऐसे में ये गीत बड़े काम आता है-

'सौ साल पहले मुझे तुम से प्यार था
आज भी है और कल भी रहेगा।''
वर्तमान- ता, ते ,ती Present Tense is है
भूतकाल- था, थे, थी Past Tense was था
भविष्यकाल-गा, गे, गी Future Tense will गा
अंग्रेजी माध्यम से हिन्दी पढ़ाते हुए गीत को गाकर उसका अंग्रेजी अनुवाद बता कर बोर्ड पर खाका बनाते हुए जब गीत गाती हूँ तो छात्र एक दम काल समझ जाते हैं। आश्चर्य इस बात से होता है कि दो पंक्तियाँ तीनों कालों को समेटे हुए हैं, बच्चे गीत गाते हैं, काल सीखते हैं और कभी नहीं भूलते क्योंकि गीत से जोड़ कर वे काल सीखते हैं। कभी-कभी तो विद्यार्थी ये कहते हैं कि प्रेम की गंभीरता को प्रकट करने के लिये भी यह गीत महत्वपूर्ण है कि प्यार कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा। सब खिल-खिलाकर हँस पड़ते हैं यही जीवंतता हिन्दी सीखने में आसानी पैदा करती रहती है।

इस तरह जब गिनती सिखानी होती है तो टेप रेकार्ड से गीत सुना, खुद गाते- गाते सिखाती हूँ- फिल्म 'तेजाब' का ये गीत- एक दो तीन, चार पाँच छ: सात, आठ नौ दस ग्यारह, बारह तेरह....

राष्ट्रीयता सूचक शब्द श्री420 फिल्म के गीत- ''मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंग्लिस्तानी, सर पे लाल टोपी रूसी फिर भी दिल है हिन्दोस्तानी' इस गीत में आते हैं। अत: जापान से जापानी, इंग्लिस्तान से इंग्लिशस्तानी, रूस से रूसी और हिन्दोस्तान से हिन्दोस्तानी।

प्रतिध्वनित शब्द जिसे स्प्प्त0 60825 कहते हैं उन्हें आसानी से समझाने में यह गीत काम आता है-

'दिल-दिल, प्यार-व्यार, मैं क्या जानूँ रे..
जानूँ तो जानूँ बस इतना के मैं तुझे अपना जानूँ रे....'
' गाने की धुन, मधुर आवाज छात्रों को आनंदित कर देती है। गीत सुनने के बाद उन्हें एक्सरसाईज करनी होती है कि इस गीत में कौन से प्रतिध्वनित शब्द हैं बताओ। सभी छात्र मनोयोग से शीघ्र सीखते हैं और लिखते हैं इस गीत में -

'घर-वर, नाम-वाम, लट-वट, नैन-वैन
रुत-बुत, शाम-वाम, दिल-विल, प्यार-व्यार' प्रतिध्वनित शब्दों का उपयोग किया गया है।

इसी तरह 5072 वाला, वाले और वाली का प्रयोग विशेष रूप से इस गाने द्वारा बताती है-

'ए मेरे, वतन के लोगो, जरा आँख में भर लो पानी'
सारे गत का इतिहास बताते हुए ''सरहद पर मरने वाला'' के बारे में बताती हूँ तो छात्र देश के लिए कुर्बान होने वाले बहादुर सिपाहियों के बारे में भी जानते हैं उन्हे पता चलता है कि देश के वीरों का गीतों में कितना महत्व है क्योंकि हर देश में सैनिकों का ऊँचा दरजा है।

इसी तरह, जब-तब, ऐसा-वैसा, इतना-उतना के प्रयोग से जुड़े गीतों का चयन करती हूँ। हिन्दी में प्रश्न पूछने वाले सारे अक्षर क अक्षर से शुरू होते हैं जैसे क्या, कौन, कैसे, कब, किधर, कितना, कैसा, किसका वगैरह अब ये सिखाने में अमरप्रेम फिल्म का लोकप्रिय गीत बहुत काम आता है-

ये क्या हुआ?
कैसे हुआ?
कब हुआ?
जब हुआ, तब हुआ
ओ छोड़ो ये न पूछो
ये क्या हुआ?
व्याकरण के अलावा भाषा संस्कृति व त्यौहारों को भी ले कर चलती है। अत: होली जब आती है तो होली के गीत वीडियो पर दिखा होली कैसे मनाई जाती है उसका प्रत्यक्ष रूप कक्षा में होली मनाकर दिखाती हूँ। होली का गीत सिखाती हूँ-

होली आई रे कन्हाई रंग छलके,
सुना दे जरा बाँसुरी।
धीरे-धीरे विद्यार्थी खुद भी गीतों के माध्यम से सीखने लगते हैं। एक छात्र ने एक बार कहा, ''गोद'' स्त्री लिंग है या पुलिंग समझ नहीं आ रहा था तो मैंने आपका फार्मुला अपनाया और गोद के लिये गीत ढूँढने लगा तो टाईटल मिला- ''हिमालय की गोद में' और मैंने जाना गोद स्त्री लिंग है।

आज हिन्दी फिल्में सारी दुनिया में मशहूर हैं और उनके गाने भाषा न जानते हुए भी लोग गुनगुनाते हैं। अगर गीतों के अर्थ भी उन्हें समझ आ जाएँ तो सोचिये उनके आनंद की सीमा नहीं रहेगी। इसी भावना से प्रेरित हो स्थानीय इण्डियन रेडियो आर॰बी॰सी॰ पर ''हिन्दी गीतों के माध्यम से आओ हिन्दी सीखें'' कार्यक्रम प्रस्तुत करती थी। दो वर्ष लगातार हर रविवार की शाम 7-30 से 7-40 तक दस मिनट के इस कार्यक्रम में 30 मिनिट टेलिफोन बजता था, लोग फरमाइश करते थे कि अगले हफ़्ते प्लीज ये गीत बजाइयेगा, आप जिस तरह उच्चारण, शब्द अर्थ के साथ हर पंक्ति का भावानुवाद अंग्रेजी में कर के समझाती हैं हमें बड़ा अच्छा लगता है, अब सिर धुन ही नहीं, गीत का अर्थ भी हम समझते हैं, गॉड, ब्लैस यू, यू आर ग्रेट और जाने क्या-क्या आशीर्वाद मिलते। गीत खत्म होने पर आज के तीन शब्द जैसे कि सुप्रभात, शुभरात्रि व शुभकामना, इस तरह हिन्दी के शब्द व एक गीत हर हफ्ते लोग सीखते थे। कार्यक्रम की सफलता ये थी कि एक बार एक बुजुर्ग महिला का फोन आया, वे बोलीं, पिछले पंद्रह-बीस साल से मैं जब भी ये गीत सुनती-

''एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा...''

तो उसमें एक पंक्ति पर लेखक को खूब कोसती कि उसने लड़की को देखा और उसे जंगल की आग दिखाई दी, लेकिन आज आपने बताया- संदल। और संदल, चंदन को कहते हैं यानि खुश्बू की बात है.. अब मुझे शांति हुई तुम्हें बहुत-बहुत आशीर्वाद सत्य बताने का। कोलंबिया विश्वविद्यालय में 'तमाशा' विद्यार्थियों की एक संस्था है जिसके वार्षिक उत्सव के लिए लड़के-लइकियाँ हिन्दी फिल्मी गीतों को नृत्य के लिये चुनते हैं। कई बार ऐसे ऊटपटांग गाने पसंद कर लेते थे कि मन बहुत दुःखी होता था कि वे भारतीय संस्कृति के नाम पर उन्हें प्रस्तुत कर रहे हैं। दरअसल बात ये थी कि उन्हें उन गीतों के अर्थ नहीं मालूम होते थे। एक बार मेरी कक्षा की तीन चार लड़कियों मुझे बताने लगी कि इस बार इस गीत पर वे नृत्य करेंगी। मैंने कहा- ''तुम्हें इस गीत के शब्दों का अर्थ पता है?' वे बोली- नहीं। जब मैंने उन्हें बताया तो वे बोली, ''ओ, नो, अच्छा हुआ अब हम कोई और अच्छा गीत चुनती है।'' मेरे विद्यार्थी हमेशा कहते आप कोई ऐसी पुस्तक क्यों नहीं लिखती जिस में हिन्दी सिनेमा के श्रेष्ठ गीत हों ताकि हमें चुनाव में आसानी हो जाए। इस तरह मेरी बहुचर्चित पुस्तक 'लर्न हिन्दी एण्ड हिन्दी फिल्म सोंग्स' का जन्म हुआ जिसमें 25 विभिन्न रंगों के श्रेष्ठ गीत हैं। पहला संस्करण तीन महीने मॅ ही खत्म हो गया। सब कहते इस के साथ सी॰डी॰ हो तो सोने पर सुहागा हो जाये क्योंकि कक्षा में सिखाने के लिए इंटरनेट या आडियो कैसेट्‌स पर गीत ढूँढने पडते हैं। यह काम न्युयार्क लाईफ इन्श्योरन्स कम्पनी ने कर डाला। किसी भारतीय लेखक के लिए ये फक्र की बात है कि किसी विदेशी कम्पनी द्वारा वो भी हिन्दी की पुस्तक व सीडी प्रसारित की जाए। सारी अमरीका मॅ दस हजार पुस्तकें व सीडी. मुफ्त में कम्पनी द्वारा वितरित की गई, बच्चों ने पुस्तक पाने हेतु सुंदर विज्ञापन बनाये। हिन्दी के एक विद्वान का फोन आया, ''अंजना जी, हमें आप पर गर्व है, आप के कारण अंग्रेजी के अखबारों में हिन्दी की पुस्तक के विज्ञापन वो भी विदेशी धरती पर आए, बहुत-बहुत साधुवाद।''

अमरीका मॅ पेंसिलवेनिया युनिवर्सिटी में हिन्दी के प्राध्यापक विशेषज्ञ डॉ॰ सुरेन्द्र गंभीर ने इस पुस्तक के बारे मॅ लिखा-

'डॉ अंजना संधीर ने हिन्दी गानों का यह संचयन हमारे सामने प्रस्तुत किया है। भाषा सिखाने की आवश्यकताओं को दृष्टि मॅ रखते हुए उन्होंने अपने चयन मॅ गानों की भाषा और शब्द संपदा पर विशेष ध्यान रखा है। मुझे विश्वास है कि उनके इस प्रयास से सभी लाभान्वित होंगे और हिन्दी गानों की यह सशक्त विधा भाषा-शिक्षण के पाठ्‌यक्रमों में अधिक प्रभाव के साथ उभरेगी।''

प्रो॰ सुरेन्द्र गंभीर, पेन्सिवेनिया विश्वविद्यालय, फिलाडेलफिया ''आप की पुस्तक और सी॰डी॰ मैंने पढ़ी और देखी। यह एक सर्वथा मौलिक कल्पना है। हिन्दी फिल्मों के गीतों के उपयोग का एक रूप यह भी हो सकता है, इससे पूर्व किसी ने सोचा भी नहीं था। ये फिल्मी गीत कभी हिन्दी के शिक्षण में भी काम आ सकते हैं। इसकी जानकारी न तो लिखने वालों को थी और न इन्हें गाने वालों को ही। यह एक अद्भुत तथा नवीन प्रयोग है जो हिन्दी को सिखायेगा भी और भारतीय संस्कृति तथा समाज से परिचित भी करायेगा। मैं नहीं समझता कि ऐसे सांस्कृतिक फिल्मी गीत किसी और भाषा र्मे हॉगे। आपके इस ऐतिहासिक महत्व के कार्य के लिए में आपको बधाई देता हूँ और आशा करता हूँ कि हिन्दी के शिक्षण तथा उसके प्रचार, विकास के लिए आप ऐसे मौलिक कार्यों को जन्म देती रहेंगी।'

-कमल किशोर गोयनका, नई दिल्ली
''हिन्दी की एक कहावत भी खूब है कि जैसा देश वैसा वेश। न्यूयार्क र्मे रह रही डॉ. अंजना संधीर ने वहाँ छात्रों और आमजन को हिन्दी सिखाने का जो तरीका निकाला है वह एक दम फिल्मी लगता है। हिन्दी फिल्मों के गीत गा-सुनाकर वे छात्रों को भूत- भविष्य और वर्तमानकाल के बारे में समझा देती हैं और एक-दो-तीन वाला फिल्मी गीत सुनाकर हिन्दी की गिनती सिखाती हैं। ऐ मेरे वतन के लोगो - के माध्यम से शहीद सिपाही का गर्व समझाती हैं। हिन्दी और भारतीय भाषा संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए किए गए उनके इस बेमिसाल उल्लेखनीय कार्य के लिए मैं उन्हॅ हदृय की गहराईयों से बधाई देता हूँ।'' - डॉ॰ कन्हैयालाल नंदन, नई दिल्ली

इस पुस्तक ने हिन्दी के आन्दोलन को वेग दिया। आज विभिन्न विश्वविद्यालयों मॅ इसके आधार पर पाठ्‌यक्रम बनने लगे हैं। आज हर विश्वविद्यालय में फिल्मी गीतों का प्रयोग हिन्दी सिखाने में किया जाता है। हिन्दी के प्रचार-प्रसार में हमारी हिन्दी फिल्मों व फिल्मी गीतों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

विश्वविद्यालय मॅ विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी पसंद करने वाले छात्र विभिन्न कारण देते हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह कारण भी मुख्य रूप से आने लगा है कि वे हिन्दी फिल्मों को समझना चाहते हैं व फिल्मी गीतों का आनंद भी लेना चाहते हैं। अपने व्यक्तिगत अनुभव से यह कहना अवश्य चाहती हूँ कि विदेशों में छात्रों को हिन्दी शास्त्री बनकर सिखायी नहीं जा सकती, क्योंकि छात्रों को जितनी आसानी से, सरलता पूर्वक, विभिन्न माध्यमों से सुरुचिपूर्ण सामग्री बनाकर अगर हम नहीं सिखाते तो कक्षाओं में संख्या घटने लगती है। शिक्षा के विभिन्त माध्यमों में हिन्दी फिल्में व फिल्मी गीत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, इन्हें नकारा नहीं जा सकता।

-डॉ॰ अंजना संधीर
भूतपूर्व प्रा. कोलंबिया विश्वविद्यालय-न्यूयार्क, यू॰एस॰ए॰
प्रा. भारतीय भाषा संस्कृति संस्थान,
गुजरात विद्यापीठ-अहमदाबाद
आवास - एल-104, शिलालेख सोसायटी,
शाहीबाग, अहमदाबाद-380004
मो. 09099024995


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