चमत्कारिक तेल - उमेश पाण्डे Chamatkaarik Teil - Hindi book by - Umesh Pandey
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चमत्कारिक तेल

उमेश पाण्डे

प्रकाशक : निरोगी दुनिया प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2016
आईएसबीएन : 9789385151071 मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पृष्ठ :252 पुस्तक क्रमांक : 9417

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प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

दो शब्द

यह सर्वविदित है कि वृक्ष प्रत्यक्ष देवता हैं, इसीलिये हिन्दू समाज में उन्हें देवताओं की भांति पूजा भी जाता है। वे मनुष्य की अनेक प्रकार की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं, हमारे स्वास्थ्य को अक्षुण्य बनाते हैं और अन्य प्रकार की समस्याओं से हमारी रक्षा भी करते हैं। उनसे हमेशा हमें बहुत कुछ प्राप्त होता है; उन्हें हमें उनकी देखभाल के अतिरिक्त कभी कुछ देना नहीं पड़ता है। पौधे हमें अनेक वस्तुयें देते हैं। इनमें अनेक चीजें ऐसी हैं जिनकी प्राप्ति हमें प्रत्यक्ष रूप से होती है। इनमें स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्द्धक फलों को लिया जा सकता है। अनेक ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें वृक्षों से प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त नहीं होती हैं, अपितु उन्हें कुछ प्रयासों के पश्चात् प्राप्त करके लाभ लिया जा सकता है। इनमें से एक प्रमुख एवं उपयोगी वस्तु है - तेल। तेल पौधों से सीधे-सीधे प्राप्त नहीं होता है बल्कि उसे वृक्ष के विभिन्न अंगों से और विशेष विधियों से प्राप्त करना होता है। वनस्पतियों से प्राप्त अन्य पदार्थों की भांति तेल भी मानव मात्र के लिये परम उपयोगी एवं कल्याणकारक होते है। वृक्षों से प्राप्त तेलों का प्रयोग औषधीय रूप में प्राचीनकाल से चला आ रहा है और सृष्टि रहने तक होता रहेगा। तेलों का विभिन्न रूपों में प्रयोग करके स्वास्थ्य रक्षा होती है, रोगों से मुक्ति भी प्राप्त होती है, इसके अतिरिक्त अनेक ऐसे चमत्कारिक प्रयोग भी किये जा सकते हैं जो मनष्य को जीवन में आने वाली अनेक प्रकार की समस्याओं से मुक्त करते हैं। इनमें ऐसे बहुत से प्रयोग हैं जिनसे आम पाठक परिचित नहीं है।

पौधों से प्राप्त अनेक सामान्य तेलों से हम सब भलीभांति परिचित हैं। इनका हम दैनिक जीवन में प्रयोग करते हैं किन्तु हममें से अधिकांश व्यक्ति उन तेलों में छिपी हुई दिव्यता से अनभिज्ञ हैं, ऐसा मेरा मानना है। दरअसल तेलों की इन विशेषताओं से पूर्व में मैं भी भिज्ञ नहीं था किन्तु ईश्वर की कृपा से समय-समय पर अनेक सिद्ध-महात्माओं से भेंट हुई, उनके दर्शन लाभ हुये और उन्हीं के सानिध्य से मुझे तेलों के अनेक दिव्य गुणों की जानकारी हुई। लोक अंचल में अनेक बुजुर्गों एवं ज्ञानियों के सम्पर्क ने इस ज्ञान में और भी वृद्धि की। तेलों की इतनी दिव्यता एवं उपयोगिता के बारे में जानकर मेरी उत्सुकता बढ़ती चली गई। इस विषय पर मैंने काफी काम किया और अनेक रहस्यों को जानने में सफल भी हुआ। एक लम्बे समय तक मैं इस विषय पर शोध कार्य करता रहा। बाद में मैंने यह निश्चय किया कि तेलों की उपयोगिता एवं दिव्यता के बारे में पाठकों को भी परिचित कराया जाना चाहिये, इसलिये मैंने तेलों के बारे में जितना भी जाना-समझा, उस सभी को इस पुस्तक के रूप में लिपिबद्ध कर दिया है।

इस विश्वास के साथ कि इन्हें जानकर, इनका प्रयोग करके पाठकगण अवश्य ही लाभान्वित होंगे। मेरा यह प्रयास कहां तक सफल हुआ है, इसका निर्णय मैं आप पर छोड़ता हूँ। इस पुस्तक में मैंने जितने भी तेलों का वर्णन किया है, वे आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं या फिर उन्हें आसानी से बनाया जा सकता है। उनके औषधीय अथवा अन्य दिव्य प्रयोग भी सरल, निरापद एवं प्रभावी हैं। इनके प्रयोग से वांछित परिणामों की प्राप्ति अवश्य होगी, इसमें संदेह नहीं है। प्रश्न आपके विश्वास, श्रद्धा एवं धैर्य का है। हां, इनमें जिन औषधीय प्रयोगों में तेल को ग्रहण करने के लिये कहा गया है, वहां आप उन्हें किसी योग्य वैद्य के परामर्श एवं निर्देशन में ही करें। हालांकि चमत्कारिक तेल पुस्तक में वर्णित यथासम्भव अधिकांश प्रयोगों को मैंने ऐसे ही लिखा है कि वे आपके लिये निरापद रहें।

किसी भी अच्छे कार्य को अच्छे स्वरूप में प्रस्तुत करने में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अनेक व्यक्तियों का सहयोग रहता है। इस पुस्तक के लेखन एवं प्रकाशन में भी मुझे बहुत अधिक सहयोग प्राप्त हुआ है। उन सबके प्रति मैं बहुत आभारी हूँ।

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