वैचारिक स्वराज्य - रामेश्वर प्रसाद मिश्र Vaicharik Swarajya - Hindi book by - Rameshwar Prasad Mishra
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वैचारिक स्वराज्य

रामेश्वर प्रसाद मिश्र

प्रकाशक : सृजनकर्म प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2013
आईएसबीएन : 0000000000 मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पृष्ठ :64 पुस्तक क्रमांक : 8885

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किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रज्ञा एवं पुरुषार्थ के फलीभूत होने लिए आवश्यक है कि..

Ek Break Ke Baad

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

किसी भी समाज और राष्ट्र की प्रज्ञा एवं पुरुषार्थ के फलीभूत होने लिए आवश्यक है कि उसका वैचारिक अधिष्ठान उसकी अपनी सांस्कृतिक परम्परा में स्थित हो। अन्यथा पुरुषार्थ कुंठित होगा एवं जो फलीभूत होगा, वह भी अन्यों के सेवा में नियोजित होगा।

भारत में शिक्षा, न्याय, वाणिज्य, शासन, प्रशासन तथा उत्कर्ष एवं पुरुषार्थ सम्बन्धी सम्पूर्ण घटनाएं यूरोकेन्द्रित चिंतन से प्रभावित है तथा इंडिया एक्ट 1935 की निरंतरता में ही शासन का विधान चल रहा है।

वैचारिक स्वाराज्य के लिये आवश्यक है कि आत्मबोध, जगत्बोध, विश्वदृष्टि, इतिहास, शिक्षा, राज्य, न्याय, जीवन-लक्ष्य आदि विषयों में आत्म-स्मृति जीवंत रहे तथा भारतीय विद्या - परम्पराएं पुनः प्रतिष्ठित होकर प्रवाहित हों।

प्रस्तुत पुस्तक इसी के आधार-सूत्र प्रस्तुत करती है।

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