संभाल कर रखना - राजेन्द्र तिवारी Sambhal Kar Rakhna - Hindi book by - Rajendra Tiwari
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संभाल कर रखना

राजेन्द्र तिवारी

प्रकाशक : उत्तरा बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2012
पृष्ठ :120
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 8809
आईएसबीएन :9788192413822

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तुम्हारे सजने-सँवरने के काम आयेंगे, मेरे खयाल के जेवर सम्भाल कर रखना....

Ek Break Ke Baad

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

मुझे शायरी का शौक कहाँ से लगा यह तो नहीं जानता, मगर इतना मालूम है कि कविता मुझे विरासत में नहीं मिली।

पिता जी की अन्तर्मुखी प्रवृत्ति, अध्ययनशीलता और पुस्तक प्रेम मेरे भीतर समाया हुआ था। समय के साथ ही कविताएं पढ़ने-सुनने का शौक न जाने कैसे तुकबन्दी में बदल गया और अनजाने में ही मैं शायरी के स्कूल में दाखिल हो गया। शुरुआती दौर में आम नौजवानों की तरह जज्बों को जबान देकर डायरी मे नोट करता रहा।

शायरी का मौजूदा हाल यूँ है कि -
सर पे जिम्मेदारियों का बोझ है, भारी भी है।
डगमगाते पाँवों से लेकिन सफर जारी भी है।


शायरी मेरे लिए पेशा नहीं इबादत है और गजल मेरी मुहब्बत। इसलिए मैं गजल को हिन्दी-उर्दू के नाम पर बाँटे जाने का कायल नहीं हूँ, बल्कि फिक्रमंद हूँ कि -

तलफ्फुजों की जिरह और बयान के झगड़े।
गजल की जान न ले लें जबान के झगड़े।।

जब धूप का समन्दर कुल आसमान पर है।
ऐसे में, इक परिन्दा पहली उड़ान पर है।।

या रब तू ही बचाना आफत सी जान पर है,
फिर तीर इक नजर का तिरछी कमान पर है।

उस पार से मुहब्बत आवाज दे रही है,
दरिया उफान पर है दिल इम्तिहान पर है।

राजेन्द्र से भले ही वाकिफ न हो जमाना,
गजलों का उसकी चर्चा सबकी जुबान पर है।

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