आह - सुधीर मौर्य Aah - Hindi book by - Sudhir Maurya
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आह

सुधीर मौर्य

प्रकाशक : भारतीय साहित्य सेवक संघ प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2011
आईएसबीएन : 00000000 मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पृष्ठ :64 पुस्तक क्रमांक : 8780

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ये जो बोझल लगती है आज आंखे तेरी, तूने भी किया है शायद आज इश्क में रतजगा..

Ek Break Ke Baad

न होते अगर तुम मस्जूद मेरे हमे भी तुम्हारी परवाह न होती।
जो नजरें इनायत फरमाते हम पे तो जीस्त हमारी तबाह न होती।


तुम्हारा एजाज तुम्हारी शुजाअत का कायल है जमाना ये सारा,
विभीषन को मिलती सुलतानी कैसे जो उस पर तुम्हारी निगाह न होती।


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