आदि, अन्त और आरम्भ - निर्मल वर्मा Aadi, Anta Aur Aarambha - Hindi book by - Nirmal Verma
लोगों की राय

लेख-निबंध >> आदि, अन्त और आरम्भ

आदि, अन्त और आरम्भ

निर्मल वर्मा

प्रकाशक : भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशित वर्ष : 2010
पृष्ठ :228
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 10475
आईएसबीएन :9788126319732

Like this Hindi book 0

जब मनुष्य अपना घर छोड़े बिना निर्वासित हो जाता है, अपने ही घर में शरणार्थी की तरह रहने के लिए अभिशप्त हो जाते है.

अक्सर कहा जाता है कि बीसवीं शती में जितनी बड़ी संख्या में लोगों को अपना देश, घर-बार छोड़कर दुसरे देशों में शरण लेना पड़ा, शायद किसी और शती में नहीं. किन्तु इससे बड़ी त्रासदी शायद यह है कि जब मनुष्य अपना घर छोड़े बिना निर्वासित हो जाता है, अपने ही घर में शरणार्थी की तरह रहने के लिए अभिशप्त हो जाते है. आधुनिक जीवन की सबसे भयानक, असहनीय और अक्षम्य देन 'आत्म-उन्मूलन' का बोध है. एक तरह से यह पुस्तक निर्मल वर्मा की सामाजिक-सांस्कृतिक चिन्ताओं का ऐतिहासिक दस्तावेज़ प्रस्तुत करती है.


अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book